क्लिक करे व जानें गाड़ियों में मिलने वाले आधुनिक सेफ्टी फीचर्स के बारे में।

ऑटोमोबाइल की दुनिया में अगर किसी देश का नाम सबसे तेज़ी से बढ़ता दिखाई देता है तो वो है भारत। भारत, देश-विदेश की सभी कंपनियों के बीच तेज़ी से उभरता व सबसे बड़ा बाजार है जिसे देखते हुए सभी ऑटोमोबाइल कम्पनिया यहाँ अपने पैर ज़माने में लगी हुयी है। पर कहने को हमारा देश भले ही दुनिया के सबसे बड़े कार बाजार के रूप में जाना जाता परन्तु क्या हमारी कारे आज भी उतनी सुरक्षित है?

कार हमारे दैनिक या व्यावसयिक जीवन में अहम भूमिका निभाती है। जिसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सम्बन्ध हमारे जीवन व हमारे परिवार के भविष्य से जुड़ा होता है। तो अगर ऐसे में यदि आप एक असुरक्षित कार चला रहे है तो क्या जान-भुज कर आप अपनी या अपने परिवार के भविष्य को खतरे में नहीं डाल रहे ?

बता दे भारतीय सरकार ने आखिरकार इस गंभीर विषय पर ध्यान देते हुए Bharat New Vehicle Safety Assessment Program (BNVSAP) के तहत अक्टुंबर 2019 से सभी नयी गाड़ियों में ड्यूल एयर बैग्स, ABS को स्टैण्डर्ड तौर पर देना अनिवार्य कर दिया है। हालांकि अब भी भारतीय ग्राहकों में इन सुरक्षा से जुड़े फीचर्स के बारे में अधिक जागरूकता नहीं है जिसके चलते देश में अब भी बिना सेफ्टी फीचर्स वाली कारों की बिक्री चरम पर है।

तो आइये सेफ्टी के इसी विषय को आगे बढ़ाते हुए आज जानते है कारो में मिलने वाले उन सभी सुरक्षा फीचर्स के बारे में जिनके बारे में जानना आपके लिए है अतिआवश्यक, जिससे आपको भविष्य में कार खरीदते समय ध्यान रहे उन सभी सेफ्टी फीचर्स के बारे में जिन्हे ग्राहक अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते है।

1. एयर बैग्स व सीट बेल्ट (Air Bags & Seat Belt )

सबसे जरुरी है बेसिक सुरक्षा से जुड़ा फीचर्स जो सभी गाड़ियों में आता है वो है सीट बेल्ट, जिसे अक्सर अधिकांश चालक व पैसेंजर नज़रअंदाज़ कर देते है। यह एक सबसे जरुरी कदम है यह दुर्घटना के समय चालक व पैसेंजर को लगने वाले झटके से होने वाले दुष्प्रभाव को कम करने में उपयोगी है। यह व्यक्ति विशेष को दुर्घटना की स्तिथि में अपनी जगह बांधे रखता है जिससे डैशबोर्ड, स्टीयरिंग या अन्य किसी पार्ट अथवा भारी दुर्घटना की स्थति में चालक अथवा पैसेंजर को विंडशील्ड/विंडो से टकराने से भी रोकता है।

यही नहीं कई कारों में सीट बेल्ट लगाने पर ही एयर बैग सिस्टम भी एक्टिवटे होता है। सीट बेल्ट नहीं लगे होने पर दुर्घटना के समय एयर बैग नहीं खुलते जिससे गंभीर चोट लग सकती है या मृत्यु भी हो सकती है।

एयर बैग्स एक बेहद जरुरी फीचर्स है जो किसी दुर्घटना की स्थिति में सुरक्षा प्रधान करने का कार्य करता है। दुर्भाग्यवश भारत में मौजूद entry-level कारों में अब भी या तो एयर बैग्स मौजूद नहीं है या ऑप्शन के तौर पर दिए जाते है। प्रत्येक गाडी में कम से कम 2 एयर बैग्स फ्रंट में होना अनिवार्य है।

Airbags दुर्घटना की स्थिति में स्वचालित रूप से फूल कर गाडी में मौजूद चालक व यात्रियों को cushioning प्रदान करते है जिससे गंभीर चोटों से बचा जा सके।

भारत सरकार ने 2019 से सभी कारो में न्यूनतम दो एयर बैग्स व ABS को अनिवर्य कर दिया है।

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2. ABS (Anti-lock Braking System)

ABS भी एक सुरक्षा के नजरिये से एक बेहद जरूरी फीचर है जो आपकी गाडी में होना अनिवार्य है। ABS व्हील्स को ब्रैकिंग की स्तिथि में लॉक होने से रोकता है जिससे कार स्किड नहीं होती व गाडी पर आपका नियंत्रण बना रहता है, खास कर hard braking/emergency braking की स्तिथि में।

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3. रिवर्स पार्किंग सेंसर (Reverse Parking Sensor/ Parking Assistant System)

अधिकांश तह रिवर्स लेना कई चालकों के लिए टेढ़ी खीर है। व ऐसे में किसी दुर्घटना का हो जाना आम बात है, हलाकि इससे अधिक जान की हानि वाले केस कम ही देखे गए है परन्तु दुर्घटना के फलस्वरूप माल की हानि अवश्य ही होती है। ऐसे में reverse parking sensor एक बेहद जरुरी हो जाते है जो मदद करते है आपको गाडी रिवर्स लेने में। यह पार्किंग सेंसर्स गाडी के पिछले बम्पर पर लगाए जाते है जो की ultrasound wave टेक्नोलॉजी पर कार्य करते है व किसी बाधा (obstacle) के निकट आने पर अलार्म बजाता है।

4. ब्रेक असिस्ट (Brake Assist/ Emergency Braking Assist )

BA या Brake Assist सिस्टम को इमरजेंसी ब्रैकिंग असिस्टेंट सिस्टम भी कहते है। जैसा कि इसके नाम से साफ़ है, यह सिस्टम आपातकालीन (emergency) ब्रैकिंग की स्थिति में ब्रैकिंग प्रक्रिया को असिस्ट करता है व stopping distance को कम करता है।

BA सिस्टम ABS यूनिट पर निर्भर एक तकनीक है जो गाडी की स्पीड को भांप कर ब्रैकिंग के समय ब्रेक पेडल पर लगने वाले फाॅर्स के अनुरूप सिग्नल गाडी के ब्रेन/ दिमाग यानि ECU को भेजता है। ECU प्राप्त सिग्नल/डाटा के आधार पर ब्रेक फाॅर्स को कण्ट्रोल करता है जिससे आपातकालीन ब्रैकिंग के दौरान stopping distance (ब्रेक लगाने के बाद गाडी के रूकने की दूरी) को कम किया जा सके।

5. TCS (Traction Control System)

पथरीले, मिटटी, कीचड़, बर्फ, जल भराव क्षेत्र/मार्ग या high acceleration की स्थिति में हम अक्सर रोड/सरफेस पर अपनी पकड़ खो देते है। इस अवस्था में गाडी स्लिप होने लगती है, साथ ही ड्राइवर का गाडी से कण्ट्रोल भी छूटने लगता है। ऐसी ही समस्याओं के निवारण के लिए ट्रैक्शन कण्ट्रोल सिस्टम बहुत उपयोगी है।

ट्रैक्शन कण्ट्रोल सिस्टम प्रत्येक व्हील में लगे स्पीड/rpm सेंसर की बदलौत कार्य करता है। यह प्रत्येक व्हील की स्पीड को प्रत्यक्ष (individually) रूप से सेंस करता है। व निरंतर डाटा ECU को भेजता है। उप्पर दी गयी किसी स्थिति या अन्य किसी स्तिथि में जब गाडी के किसी पहिये की स्पीड अन्य व्हील्स के मुकाबले ज्यादा होने लगती है तो ऐसी परिस्थिति में गाडी स्लिप होने लगती है व अपना कण्ट्रोल/ट्रैक्शन लूस कर देती है। ऐसे समय TCS उस पहिये जिसकी स्पीड अन्य से अधिक है पर लगने वाले टार्क को कम/ज्यादा करता है व partially ब्रेक लगता रहता है जिससे व्हील का ट्रैक्शन रोड पर बना रहे व गाडी बिना स्लिप हुए व ड्राइवर के कण्ट्रोल में रहते हुए आगे बढ़ सके।

6. ESP (Electronic Stability Control)

ESP सिस्टम मुख्य रूप से understeer व oversteer के कारण होने वाली unstability को रोकता है। उदाहरण के तौर पर किसी टर्न के दौरान स्पीड में टर्न करने या रोड पर गाडी चलते समय कुछ सामने आजाने की स्थिति में अचानक टर्न करते समय चालक गाडी से अपना संतुलन खो देता है। कुछ इसी प्रकार के परिस्थितियों में होने वाली unstability को रोकने का कार्य ESP करता है। यह भी ट्रैक्शन कण्ट्रोल सिस्टम के समान ही कार्य करता है।

7. Hill Assist

आपने अक्सर किसी ऊंचाई/hilly क्षेत्र में चढ़ाई के दौरान की जाने वाली ब्रैकिंग व पुनः आगे बढ़ने के दौरान गाडी को पीछे लुढ़कता महसूस किया होगा। कई बार यह भरी ट्रैफिक में समस्या भी पैदा कर देता है। ऐसी ही समस्या व चढ़ाई वाले क्षेत्रों में ब्रैकिंग के बाद पुनः acceleration के समय होने वाले back roll को रोकने का कार्य Hill Assist सिस्टम करता है।

8. स्पीड अलर्ट सिस्टम (Speed Alert System) :-

स्पीड अलर्ट सिस्टम ड्राइवर को सुरक्षित ड्राइविंग स्पीड बनाए रखने में सहायक है। साथ ही यह कार को शहर/हाइवे की गति सीमा (Speed Limit) के भीतर रखने के लिए प्रेरित करता है।

यह प्रणाली ड्राइवर को तय स्पीड लिमिट से बाहर जाने पर चेतावनी देती है।

यह कार के निर्धारित गति सीमा से अधिक स्पीड पर चलने पर ड्राइवर को गति सीमा में बने रहने हेतु बीप बजा कर उसका ध्यान केंद्रित करता है।

9. सीट बेल्ट रिमाइंडर (Seat Belt Reminder System) :-

सीट बेल्ट रिमाइंडर सिस्टम, ड्राइवर सीट व फ्रंट पैसेंजर सीट में लगे वेट सेंसर (weight sensor) के द्वारा एक्टिव हो जाता है। प्राय यह सीट पर वेट/भार पड़ने से सेंसर, सिस्टम को एक्टिव कर देता है व सीट बेल्ट पहनने की वार्निंग देता है।

 

 

 

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